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हिंदी23 Feb 2026

स्वीकृत पार्षदों की नियुक्ति को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में पहली जनहित याचिका

शिकायत : एड. बैसाणे ने उठाया कानून के उल्लंघन का मुद्दा, कहा - बुद्धिजीवियों के लिए पद

संवाददाता | धुलिया

महाराष्ट्र के नगर निगमों में "स्वीकृत पार्षद" के पदों पर होने वाली नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी और राजनीतिक बंटवारे के खिलाफ धुलिया के युवा अधिवक्ता एड. मयूर बैसाणे ने कानूनी बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने इस संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय (बॉम्बे हाईकोर्ट) में महाराष्ट्र की पहली जनहित याचिका दायर की है।

यह है पूरा मामला

धुलिया के मराठी पत्रकार भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में एड. बैसाणे ने बताया कि महाराष्ट्र नगरपालिक निगम (मनोनित सदस्यों की योग्यता एवं नियुक्ति) नियम, २०१२ के नियम ४ के तहत स्वीकृत पार्षदों का पद समाज के बुद्धिजीवियों के लिए आरक्षित है।

एड. मयूर बैसाणे ने कहा कि जिस तरह राज्यसभा में विशेषज्ञों को मनोनीत किया जाता है, उसी तरह नगर निगमों में डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर, पत्रकार और समाजसेवियों को मौका मिलना चाहिए। लेकिन वास्तविकता में राजनीतिक दल अपने चहेते उम्मीदवारों और खास समर्थकों को इन पदों पर बैठा रहे हैं।

धुलिया नगर निगम का चौंकाने वाला आंकड़ा

एडवोकेट बैसाणे के सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष २००९ से अब तक धुलिया नगर निगम में १६ स्वीकृत सदस्य चुने गए हैं। इनमें से एक भी सदस्य डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर या पत्रकार श्रेणी से नहीं था।

समानता के अधिकार का हनन

२० फरवरी को दायर इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया भारतीय संविधान की धारा १४ (समानता का अधिकार) और धारा २६ का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि योग्यता और विशेषज्ञता की अनदेखी कर केवल राजनीतिक आधार पर नियुक्तियां की गईं।

व्यापक जनसमर्थन और कानूनी टीम

इस जनहित याचिका को समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन प्राप्त हुआ है। याचिका में एडवोकेट निसर्गराज गर्जे, महाराष्ट्र राज्य ठेका कामगार फेडरेशन, धुलिया जिला मराठी पत्रकार संघ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा महाराष्ट्र शिक्षक संघ का उल्लेख किया गया है।

एड. बैसाणे ने कहा कि यह मामला केवल धुलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के सभी नगर निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों के खिलाफ एक बड़ा कदम है। अब सबकी नजरें बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी हैं।

प्रकरणाचे वर्णन अशील गोपनीयतेचे संरक्षण करण्यासाठी सामान्य आणि अनामिक ठेवले आहे. मागील निकाल भविष्यातील परिणामांची हमी देत नाहीत.

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