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हिंदी7 May 2026

धुलिया मनपा द्वारा स्वीकृत पार्षद की नियुक्ति विवादों में

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धुलिया/गोपाल मारवाड़ी : महानगरपालिका निगम में स्वीकृत (अनुमोदित) पार्षदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर अब गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं और यह मामला मुंबई उच्च न्यायालय की औरंगाबाद बेंच तक पहुंच गया है।

याचिकाकर्ता एड. मयूर बैसाणे ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने नियमों की अनदेखी करते हुए और अयोग्य उम्मीदवारों को अवसर देकर बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की हैं।

याचिका में दी गई जानकारी के अनुसार, अनुमोदित पार्षद हृषिकेश वराडे और जयेश बाबडे की नियुक्ति के विरुद्ध मुख्य आपत्ति उठाई गई है। नियमों के अनुसार अनुमोदित पार्षद के पद के लिए रजिस्टर्ड सामाजिक संगठन में पाँच वर्ष का अनुभव आवश्यक है। हालांकि यह बात सामने आई है कि वराडे के पास ऐसा अनुभव नहीं है और उनके द्वारा प्रस्तुत संगठन "बालाजी सोशल फाउंडेशन, शिरपुर" के अनुभव में विसंगति पाई गई है।

याचिका में उल्लेख किया गया है कि उक्त संगठन धुलिया महानगर निगम क्षेत्र से बाहर स्थित है और इसके पंजीकरण की तिथि और अनुभव की अवधि में काफी अंतर है।

नगर सचिव विभाग पर जांच प्रक्रिया में इन खामियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया है। पत्र में कहा गया है कि कई अयोग्य उम्मीदवारों को अवैध रूप से मंजूरी देकर नियुक्तियां दी गईं। इसके चलते महानगरपालिका प्रशासन की पारदर्शिता और कथित "घोटाले" के प्रबंधन की आलोचना हो रही है।

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, २००९ से नियुक्त किए गए २३ अनुमोदित सदस्यों में से डॉक्टर, वकील, प्रोफेसर या लेखक जैसे किसी भी विशेषज्ञ क्षेत्र से संबंधित व्यक्ति को मौका नहीं दिया गया है। सिर्फ राजनीतिक सुविधा के लिए पदाधिकारियों के नाम पंजीकृत संगठनों के नाम से सूचीबद्ध किए गए हैं।

एड. मयूर बैसाणे का कहना है कि स्वीकृत पार्षद पद पर डॉक्टर, वकील, पत्रकार आदि में से योग्य बुद्धिजीवी व्यक्ति की ही नियुक्ति होनी चाहिए।

प्रकरणाचे वर्णन अशील गोपनीयतेचे संरक्षण करण्यासाठी सामान्य आणि अनामिक ठेवले आहे. मागील निकाल भविष्यातील परिणामांची हमी देत नाहीत.

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